ईदुल अज़हा के अवसर पर ज़िला प्रशासन की सक्रियता पर अवैध कटान माफियाओं नें लगाया प्रश्न चिन्ह।अंधियारी बाग़ क़ब्रस्तान में लगे हरे पेड़ों को खुले आम काट ले गए तस्कर।

रिपोर्ट : प्रमोद कुमार पाण्डेय (बलरामपुर)
ईदुल अज़हा के अवसर पर ज़िला प्रशासन की सक्रियता पर अवैध कटान माफियाओं नें लगाया प्रश्न चिन्ह।अंधियारी बाग़ क़ब्रस्तान में लगे हरे पेड़ों को खुले आम काट ले गए तस्कर।

उत्तर प्रदेश बलरामपुर। प्राप्त सूचना के अनुसार नगर कोतवाली के मोहल्ला निबकौनी स्थित अंधियारी बाग़ क़ब्रस्तान में पर्यावरण को स्वस्थ्य रखने के लिए जनता के सहयोग से हरे पेड़ लगाए गए थे।जो वर्षों बाद लोगों को अपनी हरी भरी शुद्ध छाँव में तेज़ धूप से बचा कर राहत दे रहे थे।जानकारी के अनुसार काफ़ी दिनों से इन वर्षों पुराने पेड़ों पर कुछ अराजकतत्वों की नज़र थी और वह इन पेड़ों को काटने की फ़िराक़ में लगे थे।
सूत्रों की मानें तो अवैध कटान के द्वारा लाखों की कमाई करने वाले तस्करों नें क़ब्रस्तान की देख रेख करने वाले एक व्यक्ति से सांठगांठ कर के सुनियोजित ढंग से लगभग सात हरे पेड़ों को काट लिया और कटे पेड़ों को क़ब्रस्तान में ही छुपा दिया। ईदुल अज़हा की नमाज़ अदा करने के बाद जब लोग बड़ी संख्या में क़ब्रस्तान पहुंचे तो कटे पेड़ों को देख कर आक्रोशित हो उठे मगर त्योहार के मद्देनज़र बुद्धजीवियों नें नाराज़ लोगों को शांत करा दिया। ताज़ा जानकारी के अनुसार तस्कर देर रात कटे पेड़ों को क़ब्रस्तान से उठाने की फ़िराक़ में हैं।

बता दें कि त्योहार को देखते हुए ज़िला प्रशासन ख़ास तौर से पुलिस प्रशासन चाक चौबंद व्यवस्था का दावा करते हुए ईद गाह, मस्जिद और क़ब्रस्तान जैसे स्थलों पर ख़ास निगाह रखने की बात कर रही थी ऎसे में तस्करों के द्वारा अवैध ढंग से पेड़ काटने में कैसे कामियाब हो गई यह जनचर्चा का विषय बना हुआ है।अब देखना यह है कि क्या अवैध कटान करने वाले कटे पेड़ों को उठाने में भी कामियाब होती है या पुलिस और ज़िला के उच्चाधिकारी जो पौधरोपण अभियान को सफल बनाने की मुहिम चला रही है अवैध कटान के ज़िम्मेदार तस्करों को सबक़ सिखाने में कामियाब होती है?

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