अयोध्या:* राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रही है। विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के बाद जांच का दायरा मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, नकदी गिनती की प्रक्रिया और प्रशासनिक निगरानी तक पहुंच गया है। रिपोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी *डॉ. अनिल मिश्रा* की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
SIT के अनुसार, चढ़ावे की गणना, सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित SOP के पालन की निगरानी की जिम्मेदारी वरिष्ठ स्तर पर थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि कर्मचारियों की नियमित तलाशी, बायोमीट्रिक उपस्थिति, जेब रहित वर्दी, डबल काउंटिंग सिस्टम और अन्य सुरक्षा प्रोटोकॉल का सही तरीके से पालन कराया जाता, तो चोरी जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
जांच में यह भी सामने आया है कि सुरक्षा संबंधी शिकायतें पहले ही संबंधित अधिकारियों तक पहुंच चुकी थीं, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसी आधार पर जांच एजेंसियां प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ संभावित आपराधिक साजिश के पहलू की भी जांच कर रही हैं।
SIT रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि नकदी गणना प्रक्रिया से जुड़े कुछ अधिकारियों की नियुक्ति और निगरानी की जिम्मेदारी भी वरिष्ठ स्तर पर थी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि चढ़ावा पेटियों की चाबियां किन-किन लोगों के पास थीं और सुरक्षा नियमों का पालन क्यों नहीं हुआ।
मामले में एक नया मोड़ तब आया जब ट्रस्ट के पूर्व महासचिव *चंपत राय* ने वर्ष 2025 की संयुक्त नकदी गणना गाइडलाइन से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि उन्होंने केवल वर्ष 2024 के सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। उनके इस बयान के बाद ट्रस्ट की आंतरिक कार्यप्रणाली और निर्णय प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ गई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, SIT रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों का स्वतंत्र सत्यापन किया जा रहा है। यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो डॉ. अनिल मिश्रा सहित अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी अलग से जांच जारी है।
*City Star News* इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है। जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने तक किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आएंगे, हम आपको सबसे पहले अपडेट देंगे।
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