उकाई-काकरापार बहुउद्देशीय योजना: दक्षिण गुजरात की जीवनरेखा
गुजरात | विशेष रिपोर्ट
गुजरात राज्य की स्थापना से पहले ही वर्ष 1949 में उकाई बहुउद्देशीय परियोजना की नींव रखी गई थी। आज उकाई-काकरापार बहुउद्देशीय योजना गुजरात की सबसे पुरानी और प्रमुख जल परियोजनाओं में शामिल है। दक्षिण गुजरात के लिए यह परियोजना सिंचाई, पेयजल, ऊर्जा, उद्योग और बाढ़ नियंत्रण की दृष्टि से जीवनरेखा के समान है।
तापी जिले के सोनगढ़ तालुका में उकाई गांव के पास तापी नदी पर निर्मित यह विशाल परियोजना देश की प्रमुख बहुउद्देशीय जल योजनाओं में गिनी जाती है।
दो चरणों में हुआ परियोजना का निर्माण
उकाई-काकरापार योजना का निर्माण दो प्रमुख चरणों में पूरा हुआ। पहले चरण में वर्ष 1949 से 1954 के बीच 633.50 मीटर लंबा काकरापार वियर बनाया गया।
इसके बाद दूसरे चरण में अगस्त 1961 में योजना आयोग तथा फरवरी 1962 में राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद वर्ष 1964 में उकाई बांध का निर्माण शुरू हुआ। वर्ष 1972 में बांध का निर्माण पूरा हुआ और वर्ष 1973 में पहली बार उकाई जलाशय में पानी भरा गया।
विशाल जल भंडारण और सिंचाई क्षमता
लगभग 600 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले उकाई जलाशय की कुल भंडारण क्षमता करीब 7,497 मिलियन घन मीटर, जबकि जीवित भंडारण क्षमता लगभग 6,615 मिलियन घन मीटर है।
जलाशय की लंबाई लगभग 112 किलोमीटर और औसत चौड़ाई करीब 5.5 किलोमीटर है। पूर्ण जलस्तर पर इसकी परिधि लगभग 525 किलोमीटर तक पहुंच जाती है।
इस बहुउद्देशीय योजना से करीब 3 लाख 31 हजार 557 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लाभ मिलता है। भरूच, सूरत, नवसारी, तापी और वलसाड जिलों की कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने में परियोजना की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उकाई-पूर्णा उच्चस्तरीय नहर, सोनगढ़-उच्छल-निजर, काकरापार-गोरधा-वड तथा तापी-करजण जैसी उद्वहन सिंचाई योजनाओं के माध्यम से भी ग्रामीण क्षेत्रों तक सिंचाई का पानी पहुंचाया जाता है। इन योजनाओं से तापी, सूरत और नर्मदा जिलों के कुल 298 गांवों को लाभ मिलता है।
उकाई-पूर्णा उच्चस्तरीय नहर की लंबाई 51,110 मीटर और जल वहन क्षमता 480 क्यूसेक है।
सिंचाई के साथ ऊर्जा सुरक्षा में भी अहम भूमिका
उकाई परियोजना का महत्व केवल कृषि और सिंचाई तक सीमित नहीं है। यह गुजरात की ऊर्जा व्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
परियोजना से उकाई थर्मल पावर प्लांट के 1,110 मेगावाट, हाइड्रो पावर प्लांट के 305 मेगावाट तथा काकरापार परमाणु ऊर्जा केंद्र के 1,840 मेगावाट क्षमता वाले संयंत्रों में बिजली उत्पादन के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है।
इस तरह उकाई-काकरापार परियोजना कृषि के साथ-साथ गुजरात की ऊर्जा सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।
शहरों और उद्योगों को भी मिलता है पानी
परियोजना के कमांड क्षेत्र में आने वाली महानगरपालिकाओं, नगरपालिकाओं और विभिन्न जलापूर्ति योजनाओं के माध्यम से भरूच, सूरत, नवसारी और वलसाड जिलों के विभिन्न शहरों तक पेयजल पहुंचाया जाता है।
इसके अलावा GIDC, जे.के. पेपर मिल और विभिन्न चीनी मिलों जैसे औद्योगिक संस्थानों को भी परियोजना से जल उपलब्ध कराया जाता है।
तापी नदी और उकाई जलाशय
तापी नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई से होता है। लगभग 724 किलोमीटर लंबी तापी नदी में करीब 214 किलोमीटर का प्रवाह गुजरात में है। यह गुजरात की पश्चिम की ओर बहने वाली प्रमुख नदियों में शामिल है।
उकाई जलाशय के आगे तापी नदी का जलग्रहण क्षेत्र लगभग 62,225 वर्ग किलोमीटर है। मानसून के दौरान निर्धारित जलस्तरों के अनुसार जलाशय में पानी के भंडारण और नियमन की प्रक्रिया संचालित की जाती है।
दक्षिण गुजरात के विकास की मजबूत आधारशिला
उकाई-काकरापार बहुउद्देशीय योजना ने पिछले कई दशकों में दक्षिण गुजरात के कृषि, उद्योग, ऊर्जा, पेयजल और बाढ़ नियंत्रण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
यह केवल एक बांध या जलाशय नहीं, बल्कि जल संसाधन प्रबंधन, सिंचाई, ऊर्जा उत्पादन, पेयजल आपूर्ति और औद्योगिक विकास का व्यापक आधार है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन तथा जल संसाधन एवं जल आपूर्ति मंत्री ईश्वरसिंह पटेल के नेतृत्व में यह योजना गुजरात के जल प्रबंधन, सिंचाई, पेयजल, ऊर्जा और औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
रिपोर्ट: प्रणव पटेल (गुजरात हेड)
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