गुजरात: गुजरात की 108 इमरजेंसी मेडिकल सर्विस ने अपनी सेवा के 19 वर्ष पूरे कर 20वें वर्ष में प्रवेश किया है। 29 अगस्त 2007 को शुरू हुई यह सेवा आज राज्य के नागरिकों के लिए आपातकालीन समय में जीवनरेखा बन चुकी है। अगस्त 2026 तक 108 सेवा के माध्यम से करीब 1 करोड़ 99 लाख आपातकालीन मामलों में नागरिकों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से शुरू हुई 108 सेवा ने पिछले 19 वर्षों में 19 लाख 66 हजार से अधिक गंभीर मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सेवा के माध्यम से मेडिकल, पुलिस और फायर संबंधी आपातकालीन परिस्थितियों में नागरिकों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
19 वर्षों में करोड़ों लोगों को मिली आपातकालीन सहायता

अगस्त 2026 तक 108 सेवा द्वारा करीब 1 करोड़ 99 लाख आपातकालीन मामलों में प्रतिक्रिया दी गई। इनमें 1 करोड़ 96 लाख 42 हजार से अधिक मेडिकल इमरजेंसी, 2 लाख 55 हजार से अधिक पुलिस संबंधी मामले और 8,300 से अधिक फायर इमरजेंसी शामिल हैं।
इस दौरान एंबुलेंस वाहनों ने 62 करोड़ किलोमीटर से अधिक का संचालन किया है। राज्य में प्रतिदिन औसतन 4,780 मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।
हर 21 सेकंड में एक एंबुलेंस रवाना
108 सेवा की कार्यक्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य में औसतन हर 21 सेकंड में एक 108 एंबुलेंस किसी इमरजेंसी केस के लिए रवाना होती है। सेवा का औसत रिस्पॉन्स टाइम करीब 13 मिनट 9 सेकंड है।
108 नंबर पर आने वाले करीब 99 प्रतिशत कॉल्स का जवाब पहले दो रिंग में दिया जाता है।
मातृ एवं शिशु सुरक्षा में अहम योगदान
गुजरात में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के प्रयासों में भी 108 सेवा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पिछले 19 वर्षों में 62 लाख 97 हजार से अधिक गर्भावस्था एवं प्रसूति संबंधी मामलों में सहायता प्रदान की गई।
इनमें 1 लाख 64 हजार 715 से अधिक प्रसूतियां प्रशिक्षित एंबुलेंस स्टाफ द्वारा घटनास्थल या रास्ते में सफलतापूर्वक कराई गईं।
इसके अलावा 108 सेवा ने 24 लाख 18 हजार से अधिक सड़क दुर्घटना, 11 लाख 77 हजार से अधिक गंभीर श्वास संबंधी मामलों और 9 लाख 87 हजार से अधिक हृदयाघात के मामलों में मरीजों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
एयर एंबुलेंस और बोट एंबुलेंस जैसी नई पहल
गुजरात सरकार ने 21 मार्च 2022 से जीयूजेसाइल और जीवीके ईएमआरआई के समन्वय से एकीकृत एयर एंबुलेंस सेवा शुरू की। इसके साथ ही समुद्र में काम करने वाले मछुआरों को आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पोरबंदर और ओखा बंदरगाह पर बोट एंबुलेंस सेवा भी शुरू की गई।
अत्याधुनिक तकनीक से तेज हुई इमरजेंसी रिस्पॉन्स
अहमदाबाद के नरोडा-कठवाडा क्षेत्र में 15 एकड़ में अत्याधुनिक इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर संचालित है। लोकेशन-बेस्ड सर्विस और आधुनिक CAD एप्लिकेशन के जरिए कॉल करने वाले की लोकेशन स्वतः प्राप्त की जाती है, जिससे नजदीकी एंबुलेंस को तत्काल रवाना किया जा सकता है।
नागरिकों की सुविधा के लिए 108 Citizen Mobile Application, पेपरलेस 108 इमरजेंसी सेवा और एम-गवर्नेंस जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।
गुजरात में 112 इमरजेंसी सेवा का भी एक वर्ष पूरा

गुजरात में एकीकृत इमरजेंसी हेल्पलाइन 112 ने भी अपना पहला वर्ष सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करकमलों से शुरू की गई इस सेवा के माध्यम से एक वर्ष में 10 लाख से अधिक इमरजेंसी कॉल्स अटेंड की गई हैं।
कंट्रोल रूम द्वारा प्रति मिनट औसतन 10 कॉल्स अटेंड किए जाते हैं और जरूरत के अनुसार पुलिस या संबंधित इमरजेंसी सहायता कुछ ही मिनटों में उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।
108 और 112 के कर्मचारी गुजरात के अदृश्य हीरो
108 और 112 सेवाएं 24 घंटे, 365 दिन बिना किसी अवकाश के नागरिकों की सेवा में कार्यरत हैं। कॉल सेंटर एजेंट, एंबुलेंस स्टाफ, ड्राइवर और पुलिसकर्मी आपातकाल के समय लोगों तक मदद पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
गुजरात हेड प्रणव पटेल ने कहा कि 108 और 112 जैसी आपातकालीन सेवाएं आम नागरिकों के लिए संकट की घड़ी में भरोसे का मजबूत माध्यम बन चुकी हैं।

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