लखनऊ में पेपर लीक, शिक्षा-रोजगार संकट और छात्रों पर दमन के खिलाफ विशाल प्रतिरोध मार्च, हजारों छात्र-युवा हुए शामिल

लखनऊ में पेपर लीक, शिक्षा-रोजगार संकट और छात्रों पर दमन के खिलाफ विशाल प्रतिरोध मार्च, हजारों छात्र-युवा हुए शामिल

रिपोर्टर: सोहराब आलम (लखनऊ)

लखनऊ, 24 जुलाई 2026। पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, शिक्षा और रोजगार के संकट तथा छात्रों पर कार्रवाई के विरोध में शुक्रवार को राजधानी लखनऊ में एक विशाल प्रतिरोध मार्च आयोजित किया गया। Gen Z और सिविल सोसाइटी के आह्वान पर आयोजित इस मार्च में बड़ी संख्या में छात्र, युवा, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल हुए।

यह प्रतिरोध मार्च परिवर्तन चौक से शुरू होकर शहीद स्मारक तक निकाला गया। मार्च में शामिल लोगों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, निष्पक्ष एवं पारदर्शी भर्ती परीक्षाओं और छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग को लेकर आवाज बुलंद की।

पेपर लीक और छात्रों के भविष्य का मुद्दा उठा

आयोजकों के अनुसार, यह मार्च उन छात्रों की याद और न्याय की मांग को समर्पित था, जिन्होंने पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के कारण कथित रूप से आत्महत्या जैसा कदम उठाया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं का सबसे अधिक असर देश के युवाओं पर पड़ता है। वर्षों तक परीक्षा और भर्ती की तैयारी करने वाले छात्रों का भविष्य ऐसी घटनाओं के कारण प्रभावित होता है।

मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाया जाए।

दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज का भी विरोध

प्रतिरोध मार्च के दौरान दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रखने वाले छात्रों पर बल प्रयोग की निंदा करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

वक्ताओं ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध और अपनी बात रखने का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं को सुना जाना चाहिए और संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए।

आंदोलनकारियों ने रखीं प्रमुख मांगें

प्रतिरोध मार्च के दौरान आंदोलनकारियों की ओर से सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग भी शामिल रही।

आंदोलनकारियों ने मांग की कि—

1. केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं केंद्रीय गृह मंत्री तत्काल इस्तीफा दें।

2. केंद्र और उत्तर प्रदेश में हुए सभी पेपर लीक मामलों की जवाबदेही तय की जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

3. छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं तथा दिल्ली में हुए कथित लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

4. पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था की विफलताओं के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा दिया जाए और उन्हें न्याय दिलाया जाए।

5. लखनऊ विश्वविद्यालय सहित सभी शिक्षण संस्थानों में बढ़ाई गई फीस को वापस लिया जाए तथा लखनऊ विश्वविद्यालय के निष्कासित छात्रों का निष्कासन तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।

“यह लड़ाई हर छात्र और युवा के भविष्य की लड़ाई है”

प्रतिरोध मार्च को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह संघर्ष किसी एक संगठन, संस्थान या विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के प्रत्येक छात्र और युवा के भविष्य से जुड़ा हुआ है। वक्ताओं ने शिक्षा को प्रत्येक नागरिक का अधिकार और रोजगार को युवाओं का हक बताते हुए कहा कि शिक्षा एवं रोजगार से जुड़े मुद्दों पर सरकार को जवाबदेह बनाया जाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं की समस्याओं का समाधान केवल आश्वासनों से नहीं, बल्कि ठोस नीतियों और प्रभावी कार्रवाई से होना चाहिए। वक्ताओं ने पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने, भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने और युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की मांग की।

शांतिपूर्ण मार्च के जरिए दर्ज कराई एकजुटता

प्रतिरोध मार्च में शामिल छात्रों और युवाओं ने हाथों में विभिन्न मांगों से संबंधित पोस्टर और तख्तियां लेकर अपनी आवाज बुलंद की। मार्च के दौरान शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर नारे लगाए गए।

आयोजकों का कहना है कि प्रतिरोध मार्च का उद्देश्य शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से छात्रों एवं युवाओं की समस्याओं को सामने लाना और सरकार का ध्यान इन गंभीर मुद्दों की ओर आकर्षित करना था।

शहीद स्मारक पर संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प

मार्च का समापन शहीद स्मारक पर हुआ। यहां उपस्थित लोगों ने संविधान, शिक्षा के अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।

इस दौरान छात्रों और युवाओं ने कहा कि शिक्षा एवं रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर उनकी आवाज आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने छात्र हितों की रक्षा और सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

आंदोलन संयोजन समिति

इस प्रतिरोध मार्च के आयोजन और संयोजन में डॉ. सुधांशु बाजपेई, महेंद्र यादव, अहमद रजा, अंकित गुप्ता, समर गौतम, ज्योति राय, अनिल यादव, विशाल सिंह और क्रांति कुमार सिंह सहित अन्य लोगों की भूमिका रही।

प्रमुख रूप से ये लोग रहे मौजूद

प्रतिरोध मार्च में सुधांशु बाजपेई, महेंद्र कुमार यादव, शांतम निधि, समर, अनिल यादव “मास्टर”, अंकित गुप्ता, प्रदीप शर्मा, अब्दुल वहाब, क्रांति कुमार सिंह, दीपक कबीर, अहमद रजा, विशाल सिंह, ज्योति राय और प्रिंस प्रकाश समेत बड़ी संख्या में छात्र, युवा और नागरिक उपस्थित रहे।

आयोजकों के मुताबिक, मार्च में हजारों की संख्या में लोगों की भागीदारी रही। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि शिक्षा, रोजगार, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।

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