भारी बारिश में गिर गए आम और बागवानी के पेड़? घबराएं नहीं,

भारी बारिश में गिर गए आम और बागवानी के पेड़? घबराएं नहीं, वैज्ञानिकों ने बताया दोबारा जीवित करने का तरीका

दक्षिण गुजरात के किसानों की मदद के लिए आगे आया कृषि विज्ञान, खेतों में पहुंचकर दिया जा रहा प्रत्यक्ष प्रशिक्षण.

 

नवसारी | सिटी स्टार न्यूज

दक्षिण गुजरात में लगातार हो रही भारी बारिश और प्राकृतिक आपदा के कारण हजारों किसानों की वर्षों की मेहनत से तैयार बागवानी फसलें और फलदार वृक्ष जमीन पर गिर गए हैं। ऐसे में किसानों के लिए राहत की खबर यह है कि यदि गिर चुके वृक्षों की जड़ें अभी भी मिट्टी से जुड़ी हुई हैं, तो वैज्ञानिक पद्धति और उचित देखभाल के माध्यम से उन्हें दोबारा जीवित किया जा सकता है।

इसी उद्देश्य से गुजरात सरकार, बागवानी विभाग और नवसारी कृषि विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक टीमें प्रभावित जिलों के किसानों के खेतों तक पहुंचकर उन्हें प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दे रही हैं। वैज्ञानिक किसानों को मौके पर ही गिरे हुए पेड़ों को सुरक्षित खड़ा करने और उनकी वैज्ञानिक देखभाल की जानकारी दे रहे हैं, ताकि किसानों की वर्षों की मेहनत और आर्थिक नुकसान को कम किया जा सके।

कृषि मंत्री के निर्देश पर शुरू हुआ विशेष अभियान

कृषि मंत्री जीतूभाई वाघाणी के निर्देश पर बागवानी विभाग और नवसारी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को प्रभावित गांवों का दौरा कर किसानों को वैज्ञानिक तरीके से गिरे हुए वृक्षों को पुनर्जीवित करने का प्रशिक्षण देने के आदेश दिए गए हैं।

लगातार बारिश के बावजूद वैज्ञानिकों की संयुक्त टीमें वलसाड, नवसारी, सूरत, डांग और तापी जिलों के प्रभावित गांवों में पहुंचकर किसानों को प्रत्यक्ष डेमो के माध्यम से प्रशिक्षण दे रही हैं।

किसान की सफलता बनी उम्मीद की मिसाल

नवसारी जिले के चिखली तहसील के घेज गांव के प्रगतिशील किसान मोहनभाई पटेल ने बताया कि ताउते चक्रवात के दौरान उनके बागों में कई आम के पेड़ गिर गए थे।

उन्होंने बागवानी विभाग और नवसारी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में उन पेड़ों को वैज्ञानिक तरीके से दोबारा खड़ा किया। परिणामस्वरूप लगभग 70 से 80 प्रतिशत आम के वृक्ष पूरी तरह पुनर्जीवित हो गए।

मोहनभाई पटेल का कहना है कि आज यह पहचानना भी मुश्किल है कि कौन-से पेड़ कभी जमीन पर गिर गए थे। यदि किसान वैज्ञानिक सलाह का पालन करें तो भारी नुकसान के बाद भी अपने बागों को बचाया जा सकता है।


वैज्ञानिकों ने बताए पेड़ों को बचाने के 4 आसान तरीके

1. गिरे हुए पौधे को धीरे-धीरे सीधा करें

गिरे हुए पेड़ या पौधे को एकदम जोर लगाकर सीधा न करें। इससे जड़ टूट सकती है। पौधे को धीरे-धीरे सीधा करें और बीच-बीच में लगभग 10 सेकंड का विराम लेते रहें।

2. शाखाओं की छंटाई करें

लंबी और झुकी हुई शाखाओं की छंटाई करें ताकि पौधे पर भार कम हो सके। केवल आवश्यक पत्तियां ही रहने दें। इससे नई शाखाएं और कोपलें तेजी से निकलती हैं।

3. फफूंदनाशक पेस्ट लगाएं

जहां शाखाएं काटी गई हों वहां कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (COC) का पेस्ट लगाएं। इससे संक्रमण और सड़न से बचाव होता है तथा नई वृद्धि में मदद मिलती है।

4. जड़ों का उपचार करें

  • गोबर की खाद के स्थान पर 1 किलोग्राम वर्मी कम्पोस्ट में 50 ग्राम कार्बेन्डाजिम मिलाकर 4–5 दिन बाद पौधे के चारों ओर डालें।

  • 200 लीटर पानी में 1 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा विरिडी और 2 किलोग्राम यूरिया मिलाकर प्रत्येक पौधे को लगभग 1 लीटर घोल दें।

  • इस प्रक्रिया को महीने में 2–3 बार दोहराने से जड़ों में सड़न नहीं होती और पौधा तेजी से स्वस्थ होता है।


भविष्य में नुकसान से बचने के उपाय

नवसारी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. अंकुर पटेल के अनुसार वर्षा ऋतु शुरू होने से पहले पौधों के चारों ओर कम से कम दो फुट ऊंचे मेड़ बना देने चाहिए। इससे तेज बहाव का पानी सीधे पौधों तक नहीं पहुंचता और उनकी जड़ें सुरक्षित रहती हैं।


किसानों के लिए संदेश

वैज्ञानिकों का कहना है कि बाढ़ या चक्रवात के बाद निराश होने के बजाय यदि किसान समय रहते वैज्ञानिक पद्धति अपनाएं, तो अधिकांश गिरे हुए बागवानी वृक्षों को दोबारा जीवित किया जा सकता है और लाखों रुपये का नुकसान बचाया जा सकता है।


रिपोर्ट: प्रणव पटेल
गुजरात हेड, City Star News

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