आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत बोले: “प्रदर्शनकारी जेन-ज़ी एंटी-नेशनल नहीं,

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत बोले: “प्रदर्शनकारी जेन-ज़ी एंटी-नेशनल नहीं, लोकतंत्र में संवाद और विरोध दोनों जरूरी”

मुंबई | सिटी स्टार न्यूज़

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में युवाओं, आरक्षण और एलजीबीटीक्यूआईए+ समुदाय समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन सहमति बनाने का एक माध्यम है और हाल के जेन-ज़ी (Gen-Z) आंदोलनों में उठाई गई कई शिकायतें जायज़ हैं।

मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) के 15वें स्थापना वर्ष समारोह को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि “प्रदर्शन कर रहे जेन-ज़ी देश-विरोधी नहीं हैं। वे हमारे अपने हैं और देश की अगली पीढ़ी हैं।” उन्होंने कहा कि यदि संवाद से समस्याओं का समाधान नहीं होता तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जा सकता है, लेकिन उसका उद्देश्य समाज में विभाजन नहीं बल्कि सहमति और सुधार होना चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था पर जताई चिंता

भागवत ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में अभी भी कई सुधारों की आवश्यकता है। युवाओं की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और सरकार तथा समाज को उनके साथ संवाद स्थापित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी सवाल पूछती है और तर्कसंगत जवाब चाहती है, जो लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है।

आरक्षण पर क्या बोले?

आरक्षण के मुद्दे पर आरएसएस प्रमुख ने स्पष्ट कहा कि जब तक समाज में सामाजिक भेदभाव मौजूद रहेगा, तब तक आरक्षण की आवश्यकता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि इस विषय पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और भीमराव रामजी आंबेडकर के विचारों के अनुरूप समाज को आगे बढ़ना चाहिए। उनका मानना है कि आरक्षण का उद्देश्य सामाजिक समानता स्थापित करना है, न कि स्थायी व्यवस्था बनाना।

एलजीबीटीक्यूआईए+ समुदाय पर राय

भागवत ने कहा कि एलजीबीटीक्यूआईए+ समुदाय समाज का अभिन्न हिस्सा है और भारतीय समाज में सभी को साथ लेकर चलने की परंपरा रही है। हालांकि उन्होंने कहा कि वर्तमान विवाह व्यवस्था में बदलाव करने के बजाय समान लिंग वाले साथियों के लिए अलग कानूनी व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। उनके अनुसार समाज को पहले इसके लिए तैयार करना आवश्यक है।

लोकतंत्र में संवाद सबसे महत्वपूर्ण

अपने संबोधन के अंत में भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में बहस, संवाद और शास्त्रार्थ की परंपरा समाज को मजबूत बनाती है। उन्होंने युवाओं से संविधानसम्मत और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य व्यवस्था में सुधार होना चाहिए, न कि समाज में टकराव पैदा करना।

सिटी स्टार न्यूज़ इस विषय से जुड़े सभी प्रमुख घटनाक्रमों और आधिकारिक प्रतिक्रियाओं पर अपनी नजर बनाए हुए है।

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