कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 ग्लासगो के समापन समारोह में दिखेगी अहमदाबाद की झलक,

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: ग्लासगो के समापन समारोह में दिखेगी अहमदाबाद की झलक, रविवार को भारत को मिलेगी मेजबान बैटन
हैंडओवर सेरेमनी में ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने का जश्न और भारतीय-स्कॉटिश संगीत की होगी अद्भुत जुगलबंदी
पहली बार सभी 74 राष्ट्रों और क्षेत्रों को अपनी संस्कृति के अनुसार बैटन को कस्टमाइज़ करने का मिलेगा मौका
 
गांधीनगर, 1 अगस्त: ग्लासगो में चल रहे राष्ट्रमंडल खेलों (कॉमनवेल्थ गेम्स) का रोमांच अब अपने अंतिम पड़ाव पर है, लेकिन भारत और विशेष रूप से गुजरात के लिए यह एक नई शुरुआत का प्रतीक बनने जा रहा है। खेलों के समापन समारोह में न केवल गीत-संगीत का जश्न होगा, बल्कि 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों के मेजबान के रूप में अहमदाबाद का भव्य स्वागत भी किया जाएगा। इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए गुजरात के उपमुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी ग्लासगो में मौजूद हैं।
 

गुजरात के लिए ऐतिहासिक पल, अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की आधिकारिक शुरुआत,

रविवार को ग्लासगो 2026 के समापन समारोह के दौरान एक विशेष हैंडओवर सेरेमनी आयोजित की जाएगी। इसमें होस्ट बैटन और राष्ट्रमंडल खेलों का ध्वज औपचारिक रूप से अहमदाबाद को सौंपा जाएगा। इसके साथ ही 2030 खेलों की मेजबानी के लिए अहमदाबाद की आधिकारिक यात्रा का शुभारंभ हो जाएगा। अहमदाबाद में होने वाले ये खेल बेहद खास होंगे, क्योंकि यह राष्ट्रमंडल खेलों का शताब्दी वर्ष भी होगा। 1930 में कनाडा के हैमिल्टन में शुरू हुए इन खेलों के 100 साल 2030 में अहमदाबाद में पूरे होंगे। इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन को सफल बनाने के लिए सरकार और अहमदाबाद प्रशासन अभी से पूरी ताकत के साथ तैयारियों में जुट गए हैं।
 

किंग्स बैटन रिले का दिलचस्प इतिहास 

राष्ट्रमंडल खेलों में ‘किंग्स बैटन रिले’ एक प्रमुख परंपरा है, जो सभी सदस्य देशों के समुदायों को एक-दूसरे से जोड़ती है। राष्ट्रमंडल संगठन के अनुसार, यह बैटन सभी 74 राष्ट्रों और क्षेत्रों से होकर गुजरती है। इस बार इतिहास में पहली बार एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब हर राष्ट्र और क्षेत्र को अपनी अलग बैटन मिलेगी, जिसे वे अपनी संस्कृति और रचनात्मकता के अनुसार सजा और कस्टमाइज़ कर सकेंगे। हर बैटन में महामहिम किंग चार्ल्स III का पहला संदेश रखा जाता है, और इसे समाज में बदलाव लाने वाले प्रेरणादायक व्यक्तियों द्वारा ले जाया जाता है। बता दें कि इस बैटन रिले की शुरुआत 1958 में कार्डिफ में हुई थी। इस बैटन की ऊंचाई लगभग 470 मिमी और चौड़ाई लगभग 70 मिमी होती है।
 

तीन ‘एक्ट’ में सजेगा हैंडओवर समारोह, गूंजेगा ‘वंदे मातरम’

ग्लासगो के दर्शकों को हैंडओवर सेरेमनी में ‘अहमदाबाद 2030’ में क्या खास होने वाला है, इसकी पहली झलक देखने को मिलेगी। यह पूरा सेगमेंट तीन ‘एक्ट’ में प्रस्तुत किया जाएगा। पहला एक्ट भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने के जश्न को समर्पित होगा। इसके बाद दूसरे एक्ट में शास्त्रीय संगीत की एक अनूठी जुगलबंदी देखने को मिलेगी। इसमें प्रसिद्ध भारतीय सितारवादक ऋषभ रिखीराम शर्मा और स्कॉटिश पाइप प्लेयर रॉस आइंस्ले एक साथ अपनी प्रस्तुति देंगे, जो ग्लासगो 2026 और अहमदाबाद 2030 के बीच एक सांस्कृतिक पुल का काम करेगी। 
 
वहीं, तीसरे और अंतिम एक्ट में पूरे भारत की यात्रा को मंच पर उतारा जाएगा, जिसमें विशेष रूप से गुजरात की समृद्ध संस्कृति और विरासत को दुनिया के सामने पेश किया जाएगा।
 

दो राष्ट्रों की भावना और एक नए सफर का आगाज़, अधिकारियों ने बताया ‘असाधारण पल’

इस हैंडओवर सेरेमनी को लेकर अधिकारियों में भी भारी उत्साह है। ग्लासगो 2026 की चीफ मार्केटिंग एंड सेरेमनीज ऑफिसर लुइसा महोन ने कहा कि यह हैंडओवर कोई औपचारिकता नहीं है। यह घटना एक ही मंच पर दो राष्ट्रों की भावना को व्यक्त करेगी, जहाँ सितार और पाइप्स के बीच एक असाधारण जुगलबंदी होगी। उन्होंने बताया कि इसमें वंदे मातरम का जश्न भी शामिल होगा और ग्लासगो के दर्शकों को अहमदाबाद 2030 की पहली झलक भी देखने को मिलेगी। 
 
वहीं, ग्लासगो 2026 के सेरेमनी डायरेक्टर चंदा सिंह ने कहा कि इस हैंडओवर सेरेमनी के माध्यम से वे एक ऐसे भारत का प्रदर्शन करना चाहते थे जो आत्मविश्वास से भरा हो और अपनी परंपराओं से गहराई से जुड़ा हो। अहमदाबाद 2030 राष्ट्रमंडल खेलों के 100 साल का जश्न मनाएगा, और आज का यह समारोह उस ऐतिहासिक यात्रा का पहला अध्याय है।

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